शास्त्र वचन


इन्द्रियेभ्यो मनः पूर्वं बुद्धिः परतरा ततः ।

बुद्धेः परतरं  ज्ञानं ज्ञानात् परतरं महत् ॥

अर्थ : मनु, बृहस्पतिसे कहते हैं : इन्द्रियोंसे मन श्रेष्ठ है, मनसे बुद्धि श्रेष्ठ है, बुद्धिसे ज्ञान श्रेष्ठतर है और ज्ञानसे परात्पर परमात्मा श्रेष्ठ है ।

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अवमानेन  कुरुते  न  प्रीयति  न हृष्यति ।

ईदृशो जापको याति निरयं नात्र संशयः ॥

अर्थ : भीष्म, युधिष्ठिरको जप करनेवाले जापकके विषयमें बताते हुए कहते हैं : जो अवहेलनापूर्वक जप करता है, उसके प्रति प्रेम या प्रसन्नता नहीं प्रकट करता है, ऐसा जापक भी निःसन्देह नरकमें ही पडता है ।



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