इन्द्रियेभ्यो मनः पूर्वं बुद्धिः परतरा ततः ।
बुद्धेः परतरं ज्ञानं ज्ञानात् परतरं महत् ॥
अर्थ : मनु, बृहस्पतिसे कहते हैं : इन्द्रियोंसे मन श्रेष्ठ है, मनसे बुद्धि श्रेष्ठ है, बुद्धिसे ज्ञान श्रेष्ठतर है और ज्ञानसे परात्पर परमात्मा श्रेष्ठ है ।
*****
अवमानेन कुरुते न प्रीयति न हृष्यति ।
ईदृशो जापको याति निरयं नात्र संशयः ॥
अर्थ : भीष्म, युधिष्ठिरको जप करनेवाले जापकके विषयमें बताते हुए कहते हैं : जो अवहेलनापूर्वक जप करता है, उसके प्रति प्रेम या प्रसन्नता नहीं प्रकट करता है, ऐसा जापक भी निःसन्देह नरकमें ही पडता है ।
Leave a Reply