महाकाल मन्दिरके गर्भगृहमें धोती-साडीके बिना नहीं मिलेगी पूजनकी अनुमति


१३ मार्च, २०२२
भगवान शिवके १२ ज्योतिर्लिंगोंमें से एक उज्जैनके महाकालेश्वर मन्दिरमें परिधान संहिताका पालन कठोरतासे होगा । जिन भक्तोंको गर्भगृहमें प्रवेश करना है, उन्हें परिधान संहिताका पालन हर हालमें करना होगा । पुजारी-पुरोहितोंपर इसकी उत्तरदायित्व होगा । इस सम्बन्धमें मन्दिर प्रशासन समितिने आदेश जारी किया है ।
महाकालेश्वर मन्दिरके गर्भगृहमें प्रवेशके लिए समय सीमा निश्चित की गई है । सामान्य श्रद्धालुओंको भी गर्भगृहमें प्रवेशकर पूजनकी सुविधा दी गई है । मन्दिर समितिने इसके लिए मध्याह्न १ से ४ बजेतकका समय निश्चित किया है । इस मध्य गर्भगृहमें निःशुल्क व सामान्य परिधानमें श्रद्धालु प्रवेशकर सकते हैं । यद्यपि, प्रवेश देनेका निर्णय मन्दिर समिति उस समय श्रद्धालुओंकी संख्याके आधारपर लेती है ।
मन्दिर प्रशासक गणेशकुमार धाकडने बताया कि परिधान संहिताके अनुसार पुरुषोंको धोती, शोला, बनियान, उपवस्त्र तथा महिलाको साडी पहनना अनिवार्य है । श्रद्धालु इस मध्य ‘मोजे’, चमडेके बटुए व ‘बेल्ट’, शस्त्र तथा चलभाष गर्भगृहमें नहीं ले जा सकते । इसपर पूर्ण प्रतिबन्ध है । देखा गया है कि श्रद्धालु पूजनके लिए गर्भगृहमें प्रवेशके समय मन्दिरकी परम्पराओं व मान्यताओंका पालन नहीं करते हैं, इससे मन्दिरकी मर्यादाको ठेस पहुंचती है । आदेशका उल्लङ्घन करनेपर नियम अनुसार कार्यवाही होगी ।
धाकडका कहना है कि परिवाद मिल रहा था कि गर्भगृहमें जानेवाले कुछ श्रद्धालु परिधान संहिताका पालन नहीं करते हैं । इसके चलते यह आदेश जारीकर परिधान संहिताका पालन अनिवार्य किया गया है । इसके पालनका
उत्तरदायित्व भी सम्बन्धित पुजारी और पुरोहितका होगा ।
        यदि श्रद्धालु व पुजारी, पुरोहित आदेशका पालन नहीं करते हैं तो उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जाएगी । मन्दिर प्रशासन समितिका यह निर्णय सर्वथा उचित है । मर्यादा, नियमावली, अनुशासन सनातन धर्म एवं संस्कृतिके अभिन्न अंग है; अत: इनका पालन होना ही चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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