‘३९९ कश्मीरी पण्डित मरे, मुसलमान तो १५००० मारे गए’, ‘इस्लामी’ आतङ्कियोंके बचावमें उतरी कांग्रेस, ‘द कश्मीर फाइल्स’ देख ‘नरसंहार’का ठीकरा ‘बीजेपी’पर फोडा


१४ मार्च, २०२२
      ‘द कश्मीर फाइल्स’की अपार सफलताके पश्चात कांग्रेस दलने ‘इस्लामी’ कट्टरपन्थियोंके बचावमें एकके पश्चात एक ‘ट्वीट’ करके ये सिद्ध करनेका प्रयास किया है कि १९९० में जो कुछ भी कश्मीरमें हुआ, उसके पीछे ‘इस्लामी’ कट्टरपन्थी नहीं; अपितु ‘आरएसएस’से जुडे राज्यपाल जगमोहन और ‘भाजपा’ उत्तरदायी थी । दलने ‘कश्मीर फाइल्स बनाम सत्य’ ‘हैशटैग’के साथ ९ ‘ट्वीट’ किए और प्रतिवाद (दावा) किया कि जो वे बता रहे हैं, वहीं कश्मीरी पण्डितोंके घटनाके तथ्य हैं ।
      केरल कांग्रेसद्वारा किए गए ‘ट्वीट’में कश्मीरी पण्डितोंके नरसंहारको मुसलमानोंकी हत्यासे जोडा गया । प्रथम ‘ट्वीट’में कांग्रेसने ये दिखाया है कि भले ही १९९० से २००७ के मध्य आतङ्कियोंने ३९९ कश्मीरी पण्डितोंको मारा; किन्तु इतने ही अन्तरालमें १५००० मुसलमान भी आतङ्कियोंद्वारा मारे गए ।
      कश्मीरी पण्डितोंके अनुसार, उन्हें घाटीसे निकालनेके लिए कट्टरपन्थियोंका प्रशिक्षण बहुत पहलेसे आरम्भ हो गया था । १९८९ से भी बहुत पहले; परन्तु कांग्रेसके आगमी ‘ट्वीट’में सभी ठीकरा ‘भाजपा’ शासनपर फोडते हुए ये बताया गया कि कैसे दिसम्बर १९८९ में वीपी सिंह शासन आया और पण्डितोंके पलायनपर उन्होंने कुछ नहीं किया, केवल १९९० के नवम्बरतक वीपी सिंहको समर्थन देते रहे ।
       कांग्रेसका मुसलमान प्रेम सबके समक्ष है । इसी कारणसे देशके जनमानसने कांग्रेसको नकार दिया है । ऐसे देशविरोधी दलको अब राजनीतिमें पुनः प्रवेश नहीं मिलना चाहिए, अन्यथा देश रसातलमें होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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