भगवान भी अतिक्रमण करते हैं तो उन्हें हटाया जाएगा’, मन्दिरपर मद्रास उच्च न्यायालय, ईसाई ‘मिशनरियों’पर सुनवाईसे सर्वोच्च न्यायालयने किया मना


२६ मार्च, २०२२
      मद्रास उच्च न्यायालयने शुक्रवारको (२५ मार्च २०२२ को) एक सुनवाईके मध्य कहा कि यदि भगवान भी शासकीय स्थानपर अतिक्रमण करते हैं तो उसे हटाया जाएगा । न्यायालयने कहा कि कोई भी भगवान नहीं कहते कि सार्वजनिक स्थानोंपर मन्दिर बनाकर अतिक्रमण करो ।
      तमिलनाडुके नमक्कमें सडकपर बने, अरुलमिघू पलापट्टराई मरिअम्मन तिरुकोइल मन्दिरसे सम्बन्धित घटनाकी सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस. आनंद वेंकटेशने कहा, “हम ऐसी स्थितिमें पहुंच गए हैं, जहां भले ही भगवान सार्वजनिक स्थानपर अतिक्रमण करें, न्यायालयोंद्वारा इन अतिक्रमणोंको हटानेका निर्देश देंगी; क्योंकि सार्वजनिक हित और विधानके शासनको सुरक्षित और स्थिर रखा जाना चाहिए ।”
       यद्यपि, जब हिन्दू धर्म परिषदने ईसाई ‘मिशनरियों’की गतिविधियोंसे सम्बन्धित जब सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका दी तो न्यायालयने इसे निरस्त कर दिया था । न्यायालयका तर्क था कि इससे ‘भाईचारा’ बिगड सकता है ।
     बता दें कि न्यायालयके निर्देशपर शुक्रवारको (१५ मार्च २०२२ को) शिवलिंगको भी उखाडकर न्यायालयमें उपस्थित कर दिया जाता है । रायगढ जनपदके अधिकारियोंके अनुसार, भगवान शिवने भूमिपर अवैध अतिक्रमण किया है । सूचनामें उपस्थित न होनेकी दशामें उनपर १० सहस्र रुपए अर्थदण्ड भी लगानेकी सिद्धता थी । स्थानीय ग्रामीणोंने विवश होकर शिवलिंगको उखाड कर न्यायालयमें प्रस्तुत किया ।
     जो न्याय करते हुए दोहरे मापदण्ड रखती हो, ऐसी धर्मभ्रष्ट न्याय व्यवस्थाका शीघ्र ही अन्त होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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