कश्मीरी हिन्दुओंके लिए न्यायकी मांग हेतु सर्वोच्च न्यायालयमें अब ‘क्यूरेटिव पिटिशन’की गई प्रविष्ट


२५ मार्च, २०२२
           चलचित्र ‘द कश्मीर फाइल्स’में कश्मीरी हिन्दुओंके साथ हुए नरसंहारको देखनेके पश्चात एक बार पुनः यह मांग उठने लगी है कि कश्मीरी हिन्दुओंको न्याय मिलना चाहिए  । इसी अन्तर्गत गुरुवारको सर्वोच्च न्यायालयमें कश्मीरी हिन्दुओंके संगठन ‘रूट्स इन कश्मीर’की ओरसे ‘क्यूरेटिव पिटीशन’ प्रविष्ट कर जांचकी विनतीकी गई है । सर्वोच्च न्यायालयने कश्मीरी हिन्दुओंकी मृत्युके प्रकरणमें प्रविष्ट याचिका २०१७ में निरस्त कर दी तथा कहा गया था कि प्रकरणमें २७ वर्ष पश्चात साक्ष्य नहीं है । अब सर्वोच्च न्यायालयमें याचिकाकर्ताओंने ‘क्यूरेटिव पिटीशन’ प्रविष्ट कर यह भी कहा गया है कि प्रकरणके विलम्ब होनेको आधार मान इसे निरस्त न किया जाए । सर्वोच्च न्यायालयद्वारा २४ जुलाई २०१७ को जांचकी मांगवाली याचिकाको निरस्तकर कहा गया था कि २७ वर्ष पश्चात साक्ष्य नहीं है, जो भी हुआ वह हृदयविदारक था; परन्तु अब आदेश नहीं हो सकता है । इसके पश्चात न्यायालयमें ‘रिव्यू पिटीशन भी प्रविष्ट की गई थी, जिसे २४ अक्टूबर २०१७ को निरस्त कर दिया गया था । वहीं अब ‘क्यूरेटिव पिटिशन’ प्रविष्ट किया गया है । याचिकाकर्ताओंने यह भी कहा कि केन्द्र एवं राज्य शासनने ध्यान नहीं दिया और न्यायपालिकामें इसपर उचित कार्यवाही नहीं हो पाई । वहीं, ७०० कश्मीरी हिन्दुओंकी हत्याके प्रकरणमें २१५ अभियोग प्रविष्ट हुए; परन्तु किसी भी प्रकरणमें जांच निर्णयतक भी नहीं गई ।
         आंग्ल (अंग्रेजी) भाषामें कहते है ‘जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड’; अतः सर्वोच्च न्यायालयको उपलब्ध साक्ष्योंका संज्ञान लेते हुए शीघ्र ही इस भीषण नरसंहारपर कार्यवाही आरम्भकर, आरोपी जिहादियोंको मृत्युदण्ड प्रदान करना चाहिए । यही सम्पूर्ण भारतके धर्मप्रेमियोंकी भी मांग है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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