‘हलाल मांस’ एवं उत्पादोंके राष्ट्रव्यापी बहिष्कारकी हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा मांग
३० मार्च, २०२२
भारतमें आज सभी उत्पादोंके लिए ‘हलाल’ प्रमाणपत्र लेनेका ‘इस्लामी’ षड्यन्त्र चल रहा है । ‘हलाल’ प्रमाणपत्रके माध्यमसे जिहादी संगठन सहस्रों कोटि (करोड) रुपए एकत्रित कर रहे हैं और इस धनका उपयोग राष्ट्रविरोधी गतिविधियोंके लिए किया जा रहा है, ऐसा ध्यानमें आया है । भारतमें हलाल प्रमाणपत्र प्रदान करनेवाले ‘इस्लामी’ संगठन आतङ्की गतिविधियोंमें संलिप्त आतङ्कियोंकी ‘कानूनी’ सहायता कर रहे हैं । यह ‘हलाल’ प्रमाणपत्रको विधानकी मान्यता नहीं है । यह प्रमाणपत्र ही अवैध है ।
भारतके धर्मनिरपेक्ष संविधानमें धर्म एवं जातिके आधारपर प्रमाणपत्र देना संविधानके विरुद्ध है, केवल इतना ही नहीं; अपितु ‘इस्लामी’ पद्धतिके अनुसार अब उनके धर्मको अर्पण वस्तु पुनः गुढी पडवाके दिन (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) हिन्दू देवताओंको अर्पण करना अनुचित है; इसलिए हिन्दुओंको गुढी पडवाके समय ‘हलाल मांस’का उपयोग नहीं करना चाहिए और ‘हलाल’ उत्पादोंका बहिष्कार करना चाहिए, ऐसा आवाहन हिन्दू जनजागृति समितिने किया है ।
‘हलाल मांस’ क्या होता है ?
‘हलाल’ पद्धतिसे मांस प्राप्त करनेके लिए पशुका मुख मक्काकी दिशामें कर उसके गलेकी नस काटी जाती है और उसे छोड दिया जाता है । उससे बडी मात्रामें रक्तस्राव होता है और उसके उपरान्त उस पशुकी तडप-तडपकर मृत्यु हो जाती है ।
‘झटका मांस’ क्या होता है ?
हिन्दू, सिख आदि भारतीय धर्मोंमें झटका पद्धतिसे पशुकी हत्याकी जाती है । इसमें पशुकी गर्दनको एक ही झटकेमें काटा जाता है, उससे पशुको अल्प मात्रामें कष्ट होता है ।
किसी भी प्रकारका पशुवध कदापि स्वीकार्य नहीं किया जाना चाहिए । मांसाहारके लिए तो कठोर दण्डका प्रावधान हो; अतः हिन्दू जन जागृति समितिके इस विश्वव्यापी आवाहनपर सभी हिन्दूओंको संगठित रूपसे समर्थन देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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