कोई अध्यापक, कोई आरक्षक तो कोई संगणक संचालक, सभीके आतङ्की सम्पर्क – जम्मू-कश्मीरमें ५ शासकीय कर्मचारी निलम्बित


३१ मार्च, २०२२
जम्मू-कश्मीर प्रशासनने आतङ्कियोंसे सम्पर्क होनेके कारण ५ शासकीय कर्मचारियोंको निलम्बित कर दिया है । उनपर संविधानके अनुच्छेद ३११ (२) (सी) के अन्तर्गत कार्यवाही की गई है । जिन शासकीय कर्मचारियोंको निलम्बित किया गया है, उनमें पुलवामासे पुलिस निरीक्षक तवसीफ अहमद मीर, श्रीनगरसे संगणक संचालक घुलम हसम पेरे, अवंतीपोरासे शिक्षक अर्शीद अहमद दास, बारामूलासे ‘पुलिस’ निरीक्षक शाहिद हुसैन और कुपवाडासे ‘शराफत ए खान’का नाम सम्मिलित है ।
विदित हो कि जम्मू-कश्मीरमें हालमें आतङ्कियोंसे सम्पर्कको लेकर अनेक शासकीय कर्मचारियोंपर कार्यवाही हुई है । आतङ्कियोंके साथ मिलीभगतकी सूचना मिलनेपर शासकीय कर्मचारियोंको अभयदान नहीं दिया जाता है । चाकरीसे निकाले जानेके साथ-साथ उनपर सुरक्षा अधिनियमके अन्तर्गत अभियोजन भी चलाया जाता है ।      जम्मू-कश्मीर शासनने आदेश देकर ऐसे कर्मचारियोंको चेताया भी था ।
इससे पूर्व सितम्बर २०२१ में आतङ्कियोंके साथ मिलकर कार्य करनेके आरोपित ६ कर्मचारियोंपर राज्य शासनने बडी कार्यवाही करते हुए, उन्हें सेवासे निलम्बित कर दिया था । यह ‘ओवर ग्राउंड’ भेदियेके रूपमें कार्य कर रहे थे । निलम्बित किए गए कर्मियोंमें अनंतनागका शिक्षक हमीद वानी भी सम्मिलित था । वह आतङ्की संगठन ‘अल्लाह टाइगर’के जनपद पधाधिकारीके रूपमें कार्य कर रहा था ।
यहां जानने योग्य है कि जम्मू-कश्मीरमें देश विरोधी गतिविधियोंमें सम्मिलित शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियोंके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनेके लिए शासनने ३० जुलाई २०२० को ६ सदस्यीय एक समितिका गठन किया था । इस समिति का गठनको संविधानके अनुच्छेद ३११ (२) (सी)के अन्तर्गत प्रकरणोंकी जांच और अनुशंसा करनेके लिए किया गया था ।
       धारा ३७० को समाप्त हुए २ वर्षसे अधिक हो गए; किन्तु जम्मू-कश्मीरमें आतङ्की सम्पर्कके जो रहस्योद्घाटन हुये हैं, वह चिन्ताजनक है । शासन और प्रशासनके स्तरपर आतङ्की सम्पर्क एक गहरे षड्यन्त्रकी ओर संकेत करते हैं, जिसमें समय रहते कठोर कार्यवाही अपेक्षित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया


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