हिन्दुत्वका अर्थ ‘नाजीवाद’ और ‘फासीवाद’ – प्रश्न करने वालेको शारदा विश्वविद्यालयने किया निलम्बित
७ मई, २०२२
नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालयके प्रश्नपत्रमें हिन्दूवादियोंकी तुलना ‘फासीवादी’ और ‘नाजीवादी’से करनेपर उठे विरोधके पश्चात बडी कार्यवाही हुई है । विश्वविद्यालय प्रशासनने प्रश्नपत्र बनानेवालेको निलम्बित कर दिया है ।
शारदा विश्वविद्यालयने यह कार्यवाही ६ मई २०२२, शुक्रवारको की । साथ ही विश्वविद्यालयके ‘मैनेजमेंट’ने उस प्रश्नपत्रके लिए लोगोंसे क्षमा भी मांगी है । यद्यपि प्रश्नपत्र बनानेवालेका नाम अभीतक सार्वजनिक नहीं किया गया है ।
इस विवादित ‘पेपर’के पांचवें क्रमाङ्कपर प्रश्न किया गया था कि धर्मान्तरणके मूल कारण क्या हैं ? वहीं, छठे क्रमाङ्कपर पूछा गया था, “क्या आपको ‘नाजीवादी’, ‘फासीवादी’ और हिन्दुत्वमें कोई समानता दिखती है ?” प्रश्नपत्रमें दोनों प्रश्नोंको विस्तारसे बतानेके लिए कहा गया था ।
यह समूचा विवाद तब उठा था, जब ‘भाजपा’ नेता विकास प्रीतम सिन्हाने इसकी ‘फोटो कॉपी’ ‘ट्वीट’ करते हुए, उसमें पूछे गए एक प्रश्नको आपत्तिजनक बताया । यह प्रश्न पत्र ‘बीए’के राजनीति विज्ञानके वर्ष २०२१-२२ सत्रका था । विकास प्रीतमके अनुसार ‘पेपर’को कथित रूपसे एक मुसलमान शिक्षकने बनाया है ।
उपर्युक्त प्रकरण, हिन्दुओंके विरुद्ध एक सोचा समझा षड्यन्त्र है । इस प्रकरणकी विस्तृत जांच हो और दोषीका नाम सार्वजनिक किया जाए, ऐसा सभी हिन्दू मांग करते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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