१६ मई, २०२२
काशी विश्वनाथ मन्दिर परिसरमें स्थित ज्ञानवापी विवादित ढांचेकी वास्तविकता क्या सामने आई, सभी ‘लिबरल’ और ’कट्टर इस्लामी’ समुदाय ‘बौखला’ सा गया है । बता दें कि जिस ज्ञानवापीको ‘मस्जिद’ बताकर मुसलमान वहां ‘नमाज’ पढते आ रहे थे और जिस ‘वजू खाने’में साढे तीन ‘सदी’से हाथ-पांव धो रहे थे, वहींपर शिवलिंग मिला है । न्यायालयके निरीक्षणमें हुई प्रक्रियामें वास्तविकता सामने आनेके पश्चात ‘इस्लामी’ समुदाय इसे स्वीकार करनेको सिद्ध नहीं है ।
फैजान नामके एक-एक मुसलमान कट्टरपन्थीने ‘दावा’ किया कि हिन्दू अब ‘बाबरी २.०’ की ‘तैयारी’ कर रहे हैं । उसने ‘दावा’ किया कि बाबरीमें हिन्दू प्रतिमा रख दी गई थी और अब ज्ञानवापीके लिए भी यही ‘मॉडल’ अपनाया जा रहा है । उसने उन ‘वोकिया’ मुसलमानोंको कहा कि उन्हें लज्जा आनी चाहिए, जो कथित रूपसे ‘सेक्युलरिज्म’के लिए बाबरी हिन्दुओंको दे देनेकी परामर्श दे रहे थे ।
अनीस अहमदने भी न्यायालयके उस आदेशपर अप्रसन्नता व्यक्त की, जिसमें शिवलिंगवाले स्थानको ‘सील’ करके वहां लोगोंकी ‘आवाजाही’को प्रतिबन्धित कर दिया गया है । उसने ‘दावा’ किया कि न्यायपालिका और प्रशासनने मिल कर ऐसे ही बाबरीमें ‘नमाज’ रुकवाई थी । उसने ये भी कहा कि ज्ञानवापीके लिए चरणानुसार योजना बनाई गई है ।
ज्ञानवापीकी वास्तविकता, शीघ्र ही अब जनमानसके सामने आनेवाली है और साथ ही उजागर होनेवाला है सत्य ! ऐसेमें मुगलोंके अनुयायियों और सत्ताकी राजनीति करनेवालोंको भय लगना उचित ही है । ये हिन्दुओंके जाग्रत होनेका प्रमाण है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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