पुनः मुगलोंके गुणगानपर उतरे जावेद अख्तर, अकबरको भारतीय बताते हुए तारिक फतहको कहा ‘Shut Up’


१५ मई, २०२२
      पटकथा लेखकसे गीतकार, तत्पश्चात ‘ट्विटर ट्रोल’तक पहुंचे, जावेद अख्तरने एक बार पुनः मुगलोंका महिमामण्डन किया है । इस बार उन्होंने अकबरको आक्रान्ता माननेसे मना कर दिया । ये सब तब आरम्भ हुआ, जब इस्लामी इतिहासके ज्ञाता तारिक फतेहने ‘गरुड प्रकाशन’के संस्थापक संक्रांत सानुका एक उद्धरण साझा किया । आक्रान्ताओंकी आलोचनाको जावेद अख्तर सहन नहीं कर पाए व बोल पडे ।
      तारिक फतेहने संक्रांत सानुका जो उद्धरण ‘ट्वीट’ करते हुए कहा, “भारत एकमात्र ऐसी मुख्य सभ्यता है, जहां आपको व्यवस्थित रूपसे ये पढाया जाता है कि आप अपनी ही धरोहरसे घृणा करें और इसे नष्ट-भ्रष्ट करनेवाले आक्रान्ताओंका गुणगान करें और इस (मूढताको) ‘सेक्युलरिज्म’ कहा जाता है ।” इसपर जावेद अख्तरने पूछा कि क्या आप अमेरिकामें प्रत्येक एक श्वेत व्यक्तिको आक्रान्ता कहेंगे और उनके वंशजोंको विदेशी बताएंगे ?
      उन्होंने आगे ‘दावा’ किया कि अकबर एक भारतीय था; परन्तु आपके (तारिक फतेहके) माता-पिता भारतीय नहीं थे; क्योंकि उन्होंने पाकिस्तानमें जाकर ‘बसने’का निर्णय लिया ।
       तारिक फतेहने इसके पश्चात उत्तर दिया । उन्होंने लिखा, “जावेद अख्तर इस्लामी आक्रमण और भारतके विनाशके विषयपर विवाद करते समय ‘नाली’में गिरना रुचिकर लगता हैं । मैंने जो संक्रांत सानुका उद्धरण साझा किया था, उसपर उत्तर देनेके स्थानपर वे मुझे मौन रहनेके लिए कह रहे हैं । मुझे बताया गया है कि जावेद अख्तरके पूर्वज अरबके थे, जिनका वंश खलीफातक जाता है ।”
          जावेद अख्तर कदाचित विस्मरण कर रहे कि वे जिस देशमें रहते है वे भारत है, जिसमें अकबर जैसे आतताइयोंके लिए न पूर्वमें कोई स्थान था, न ही कभी होगा । जावेद अख्तरको ये स्पष्ट रूपसे समझ लेना चाहिए कि यदि वे अकबरके समर्थक हैं तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए । भारत में ऐसे लोगोंके लिए कोई स्थान नहीं है । ऐसा समस्त हिन्दू समाजका कहना है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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