हिन्दुओंको ज्ञानवापी अपने अधिकारमें लेना चाहिए ! – तस्लिमा नसरीन
२१ मई, २०२२
औरंगजेबने अनेक मन्दिर ध्वस्त किए । शिवमन्दिरका विध्वंस करनेके पश्चात औरंगजेबद्वारा उस स्थानपर ज्ञानवापी ‘मस्जिद’ बनाए जानेका साक्ष्य मिलना; कोई कौतूहलका विषय नहीं है । इस प्रकरणमें हिन्दुओंको ज्ञानवापी ‘मस्जिद’ अपने अधिकारमें लेना चाहिए । मुझे आशा है कि ‘ताजमहल’, ‘कुतुबमीनार’, ‘हुमायूं मकबरा’, ‘लाल किला’, आगरा किला इनका अस्तित्व बना रहेगा, ऐसा ‘ट्वीट’ बांगलादेशी लेखिका तस्लिमा नसरीनने किया है ।
ये भवन भी हिन्दुओंके हैं । केवल ज्ञानवापी मिलनेसे ही हिन्दू सन्तुष्ट नहीं होंगे, उन्हें अपनी सभी ‘इमारतें’ और वास्तु चाहिए । देशके और विदेशके कितने मुसलमान सत्य इतिहास स्वीकारकर ऐसा बतानेका साहस कर रहे हैं ?, ऐसा विचार किया तो ‘एक भी नहीं’, ऐसा ही उत्तर मिलता है । इसका अर्थ यह है कि धर्मनिरपेक्षता और अन्य धर्मोंका आदर केवल हिन्दुओंको करना चाहिए और अन्य हिन्दुओंके धार्मिक स्थलोंपर आघात करें, ऐसा ही होता है । यह बात हिन्दू ‘कमसे कम’ अब तो समझें ! आदर्शतः मुसलमान समाजको वास्तविकता व सत्यका बोध करते हुए हिन्दुओंको उनकी धरोहरें लौटानेसे पूर्व त्वरित ही सनातन धर्मकी ओर पुनः उन्मुख होना चाहिए, इसीमें सभीका हित निहित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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