हिन्दुओं, संस्कारकी कट्टरता सीखनी है, तो मुसलमानोंको अपना आदर्श बना लो !
२० मई, २०२२
अपने बच्चोंपर दृढ एवं कट्टरतासे धार्मिक संस्कार करना, अभिभावकों तथा परिवारवालोंका दायित्व है । यदि आपको संस्कारकी कट्टरता सीखनी है, तो मुसलमानोंको अपना आदर्श बना लो । हमें गांवमें मन्दिर बनानेमें रुचि है; परन्तु आरतीके लिए जानेमें नहीं । चौक-चौकमें बैठकर बातें करना; किन्तु मन्दिर जाना नहीं, ऐसा वक्तव्य ‘भाजपा’ शासनकी पर्यटन, संस्कृति एवं अध्यात्म मन्त्री उषा ठाकुरने किया । खंडवामें हुए एक कार्यक्रममें वे बोल रही थीं । उन्होंने कहा, ‘‘हिन्दुओंको मुसलमानोंसे सीख लेनी चाहिए ! मुसलमानोंको समूचे दिनमें पांच बार ‘नमाज’ पढनेके लिए कोई बुलाने जाता है क्या ? नहीं ! मुसलमान अपने निर्धारित समयमें सभी कार्य छोडकर टोपी उठाकर ‘नमाज’ पढने पहुंच जाते हैं । चाहे छोटे बच्चे हों या बडे, अधिकारी हों या व्यापारी ।’’
मध्यप्रदेशकी मन्त्री उषा ठाकुरका हिन्दुओंको अन्तर्मुख करनेवाला वक्तव्य है; किन्तु हिन्दुओंको अहिन्दू पन्थोंके मूल्यों, दुष्प्रवृत्तियों व कुकृतियोंके अन्धानुकरण व प्रतिक्रियात्मक कृतियोंसे पूर्ण सचेत होना चाहिए; विवेकपूर्वक अहिन्दू पन्थोंका अवलोकन करते हुए कालानुसार हिन्दू राष्ट्र स्थापनामें कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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