इस्लामी जिहादके विरुद्ध अब धर्मसंसद नहीं करेंगे यति नरसिंहानंद, सार्वजनिक जीवनसे लिया संन्यास


२० मई, २०२२
                  गाजियाबादके डासना देवी मन्दिरके महन्त और जूना अखाडेके महामण्डलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरीने एक चकित करनेवाली घोषणा की है । उन्होंने सार्वजनिक जीवनसे संन्यास लेकर अपना जीवन पूर्णतः धार्मिक कार्योमें लगानेके विषयमें कहा है । उन्होंने इस्लामी जिहादके विरुद्ध अपनी लडाई और धर्मसंसदके आयोजनसे भी स्वयंको पृथक करनेकी घोषणा की है । यति नरसिंहानंदने यह बात १९ मई २०२२ को कही । उन्होंने कहा कि वह जितेंद्र नारायण त्यागीके (पूर्व वसीम रिजवी) विरुद्ध हुई कार्यवाहीके लिए स्वयंको दोषी मानते हैं । वहीं एक ‘वीडियो’में उन्होंने कहा, “हम सभी जितेंद्र नारायण त्यागीको कारागृहसे लेने गए थे, उनको मुक्त कर दिया गया है । वह हमसे मिलनेसे पूर्व ही चले गए थे । उनसे हमारा यहींतकका साथ था । उनके साथ हमारे सुखद व दुखद अनुभवका पूर्णतः दोषी मैं हूं । उनकी कोई चूक नहीं है, मेरे कारण उन्हें ४ माहसे अधिक समय कारागृहमें रहना पडा, इसके लिए मैं उनसे क्षमाप्रार्थी हूं ।” ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार, यति नरसिंहानंदने यह निर्णय हिन्दू समाजकी उदासीनताके चलते लिया है । उन्होंने वर्ष  २०१२ से देवबंदके इस्लामी जिहादके विरुद्ध धर्मसंसद आरम्भ किया था; परन्तु अब उसे वह समाप्त कर रहे हैं । उन्होंने कहा, “धर्मसंसदमें कारागृह गए साथियोंके लिए संघर्षमें हिन्दू समाजने हमारा साथ नहीं दिया । हिन्दू समाजके योद्धाओंकी दुर्गति हो रही है ।” उल्लेखनीय है कि हरिद्वारमें १७ से २० दिसम्बरको धर्मसंसदका आयोजन हुआ था, जिसमें यति नरसिंहानंद गिरी और जितेन्द्र नारायण त्यागीको बन्दी बनाया गया था । वहीं सर्वोच्च न्यायालयमें भी धर्मसंसदके विरुद्ध याचिका प्रविष्ट हुई थी ।
     यति नरसिंहानंदका विचार तो योग्य है कि हिन्दू समाज अभी जागरूक नहीं हैं एवं संगठित होकर धर्मरक्षा हेतु तत्पर नहीं रहता; परन्तु इस प्रकार समस्याओंके सम्मुख घुटने टेकना योग्य नहीं है । स्वामीजीको अपने युद्धको जारी रखना चाहिए एवं आनेवाले हिन्दू राष्ट्र हेतु यथासम्भव प्रयास अवश्य करने चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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