कश्मीरमें ‘टारगेट किलिंग’से भयका वातावरण, शासकीय हिन्दू कर्मचारी एक बार पुनः घाटी त्यागकर जानेको विवश


३ जून, २०२२
                कश्मीरमें हिन्दुओंको चुन-चुनकर मारा जा रहा है । इससे व्यथित हिन्दू घाटी त्यागकर पलायनको विवश हो गए हैं । गुरुवार, २ जून २०२२ को कुलगाम जनपदमें एक ‘बैंक’ प्रबन्धक विजय कुमारकी ‘बैंक’में घुसकर आतङ्कवादियोंने गोली मारकर हत्या कर दी । इसके उपरान्त काश्मीरके शासकीय कर्मचारियोंने घाटी त्यागनेका निर्णय ले लिया है ।
            इससे पूर्व ३१ मईको आतङ्कवादियोंने एक ३६ वर्षीय शिक्षिका रजनीबालाकी गोली मारकर हत्या कर दी थी । समूची पाठशालामें मात्र उन्हें मारा था; क्योंकि वे हिन्दू थीं ।
             इससे कश्मीरी पण्डित व वहां कार्यरत हिन्दू कर्मचारी अतिशय भयभीत हैं । कर्मचारियोंके ‘कोऑर्डिनेटर’ अमित रैनाने कहा कि वे लोग अभीतक सुरक्षाके लिए विभिन्न स्थानोंपर धरने दे रहे थे; परन्तु अब वस्तुस्थिति देखते हुए धरने समाप्तकर त्वरित घाटी त्यागनेके इच्छुक हैं । उन्होंने सभी स्थानोंपर विरोध प्रदर्शन बन्द कर दिए हैं ।
         उल्लेखनीय है कि २४ मईको ‘पुलिस’कर्मी सैफ कादरी व २५ मईको कश्मीरी चलचित्र कलाकार अमरीन भट्टकी आतङ्कवादियोंने गोली मारकर हत्या कर दी थी । इससे पूर्व १२ मईको एक राजस्व अधिकारी राहुल भट्टकी हत्या की थी । वे कश्मीरी पण्डित थे ।
       पाकिस्तानके षड्यन्त्रके अन्तर्गत कश्मीर घाटीमें निरपराध हिन्दुओंको तथा ‘पुलिस’कर्मियोंको चुन-चुनकर मारा जा रहा है । राष्ट्रवादी मुसलमानोंकी भी निर्मम हत्याएं हो रही हैं । यह अत्यन्त चिन्ताजनक है । जबतक कश्मीरसे आतङ्कवाद समाप्त नहीं होता, हिन्दू वहां सुरक्षित नहीं हैं । इस समस्याका योग्य समाधान पाकिस्तानका विनाश है, जिसपर केन्द्र शासनको ध्यान देना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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