स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजीको ज्ञानवापीमें पूजा करने हेतु जानेसे रोकनेपर उनका अनशन !
१६ जून, २०२२
उत्तर प्रदेशके वाराणसीमें द्वारका एवं ज्योतिष पीठके शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजीके विशेष प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वतीजी ४ जूनको ज्ञानवापी ‘मस्जिद’के ‘वजूखाना’में (नमाजके पूर्व हाथ-पांव धोनेका स्थानमें) मिले शिवलिंगकी पूजा करने जा रहे थे; परन्तु इसके पूर्व ही ‘पुलिस’ने उन्हें रोककर उनके श्रीविद्या मठमें निरुद्ध (नजरबन्द) किया । श्रीविद्या मठको ‘पुलिस’ने घेर लिया । स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजीको बाहर निकलनेसे मना कर दिया; इसलिए उन्होंने अन्नत्यागकर अनशन प्रारम्भ किया है । उन्होंने कहा कि जबतक ज्ञानवापीमें प्रकट हुए आदि विश्वेश्वर शिवलिंगकी पूजा नहीं करूंगा, तबतक मैं अन्न-जल नहीं लूंगा । ‘पुलिस’ने बताया कि ज्ञानवापीका प्रकरण न्यायालयमें प्रलम्बित है, इस कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजीको ज्ञानवापीके परिसरमें प्रार्थना करनेकी अनुमति नहीं दी गई है ।
यहां ३ जूनको आयोजित काशी धर्म परिषदकी बैठकमें साधु-सन्तोंने कुल २२ प्रस्ताव पारित किए; जिनमेंसे कुछ प्रमुख प्रस्ताव निम्नलिखित है :
१. ज्ञानवापीमें प्राप्त शिवलिंगके दर्शन एवं पूजा करनेकी अनुमति देनेकी मांग की गई है । यदि यह अनुमति अस्वीकार की गई, तो मुसलमानोंको वहां जानेके लिए प्रतिबन्धित किया जाए ।
२. ‘धार्मिक स्थान ‘कानून’ १९९१’ निरस्त करें, शिवलिंगको ‘फव्वारा’ कहनेवाले असदुद्दीन ओवैसीपर अपराध प्रविष्ट किया जाए ।
३. ‘मक्का’ एवं ‘मदीना’के ‘इमामों’को (इस्लामके धार्मिक नेताओंको) पत्र भेजकर औरंगजेबने काशी स्थित मन्दिरोंको ध्वस्त किया, इसके इतिहाससे अवगत कराया जाए ।
सन्तोंका कथन सदैव सत्य ही रहा है । योगी शासन सर्वप्रथम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदजीको ‘नजरबन्दी’से मुक्त करें एवं न्यायालयको शिवलिंग दर्शनकी अनुमतिका निर्णय शीघ्र ही देना चाहिए, अन्यथा ज्ञानवापीमें ‘नमाज’पर भी प्रतिबन्ध लगे; ऐसा सभी हिन्दू मांग करते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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