“बंगाल ‘पुलिस’ अक्षम तो केन्द्रसे सुरक्षा बल बुलाइए”, ममता बनर्जी शासनको उच्च न्यायालयसे ‘फटकार’


१५ जून, २०२२
             इस्लामके ‘पैगम्बर’ मोहम्मदके कथित अपमानपर बंगालमें मचे उत्पातपर कोलकाता उच्च न्यायालयने ममता शासनको ‘फटकारा’ है ।
            मुख्य न्यायाधीशकी पीठने कहा कि ‘सीसीटीवी फुटेज’ प्राप्त करे; जिससे अपराधियोंका अभिज्ञानकर (पहचानकर) उन्हें दण्डित किया जा सके । सम्पत्तिकी क्षतिपूर्तिपर भी शासन अपने विचार स्पष्ट करे । शासन यह भी सुनिश्चित करे कि पुनः ऐसी कोई घटना न हो । यदि स्थानीय ‘पुलिस’ उपद्रवियोंको रोकनेमें सक्षम नहीं है तो केन्द्रीय सुरक्षाबलोंकी सहायता ली जाए ।
               भिन्न-भिन्न व्यक्तियोंद्वारा दाखिल याचिकाओंपर यह सुनवाई हो रही थी । एक व्यक्तिने याचिकामें कहा है कि जब उपद्रवी ‘भाजपा’ कार्यालय जला रहे थे तो ‘पुलिस’ मूकदर्शक बनकर वहां खडी थी । ऐसे प्रसंगमें अर्द्धसैनिक बल बुलाना था । दूसरी याचिका ९ जून २०२२ को हावडा अंकुरहाटी क्षेत्रमें राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्धकर सार्वजनिक सम्पत्तिको हानि पहुंचानेपर थी । लिखा है कि उपद्रवियोंका अभिज्ञानकर उनपर प्राथमिकी प्रविष्टकर उनसे भारी दण्ड ‘वसूला’ जाए ।
             उल्लेखनीय है कि ‘पैगम्बर’के अपमानके नामपर २४ परगना जैसे अनेक जनपदोंमें उपद्रवकर हिन्दू परिवारोंके घरोंमें आग लगा दी गई । नदिया जनपद स्थित बेथुआडहरीमें १००० मुसलमानोंके जनसमूहने भारतीय रेलयानको क्षतिग्रस्त कर दिया । स्थानकपर पथराव किया ।
       यह दुःखद विषय है कि बंगालका ममता शासन मुलमान उपद्रवियोंके प्रति कठोर नहीं है । राज्य चुनावके समय भी हिन्दू परिवार चोटिल हुए थे । अब पुनः हिन्दुओंपर आक्रमण । केन्द्रके मोदी शासनको हस्तक्षेपकर हिन्दुओंकी रक्षा करनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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