तमिलनाडुमें स्वाधीनता दिवसपर एक शासकीय विद्यालयकी प्रधानाध्यापिकाने स्वयंको ईसाई बताकर राष्ट्रीय ध्वजको फहरानेसे किया मना
१८ अगस्त, २०२२
तमिलनाडुके धर्मपुरी जनपदके शासकीय विद्यालयकी प्रधानाध्यापिका तमिलसेल्वी इसी वर्ष सेवानिवृत्त हो रही हैं । जानकारीके अनुसार, उन्हें सम्मानित करनेके लिए १५ अगस्तके अवसरपर विशेष कार्यक्रमकी व्यवस्था की गई थी ।
सूत्रोंने पुष्टि की है कि प्रधानाध्यापिकाके मना करनेपर सहायक प्रधानाध्यापकद्वारा तिरंगा फहराया गया और गत स्वाधीनता दिवसपर तमिलसेल्वीने राष्ट्रीय ध्वज फहराने और तिरंगेको अभिवादन करनेसे मना कर दिया था । पूर्ववर्ती स्वाधीनता दिवस समारोहके समय अवकाश लिया था । इतना ही नहीं, गत अनेक वर्षोंसे वह अस्वस्थताका स्वांगकर कार्यक्रमके लिए विद्यालय नहीं पहुंचती थी ।
तमिलसेल्वीने एक ‘रिकॉर्ड’ चित्रपटमें तर्क दिया, “वह ईसाई पन्थकी हैं । उनका राष्ट्रीय ध्वज न फहराना या अभिवादन न करनेके पीछे राष्ट्र ध्वजका अनादर करना नहीं है । हम केवल ‘भगवान’का अभिवादन करते हैं और किसीको नहीं । हम ध्वजका सम्मान करते हैं; किन्तु हम केवल ‘भगवान’का अभिवादन करेंगे; इसलिए, हमने सहायक प्रधानाध्यापकको ध्वज फहरानेके लिए कहा ।” प्रकरणमें विवाद बढते देख धर्मपुरीके मुख्य शिक्षा अधिकारीको (सीईओको) परिवाद दिया गया । घटनाको प्रकाशमें लाया गया कि शासकीय विद्यालयकी प्रधानाध्यापिकाने स्वाधीनता दिवसके अवसरपर ध्वज न फहरानेका कृत्य किया है ।
राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है । एक ईसाई प्रधानाध्यापिकाद्वारा राष्ट्रीय ध्वजको न फहराना व अभिवादन न करना राष्ट्रका अपमान है व राष्ट्रद्रोह है, जिसका कठोर दण्ड अपराधीको मिलना चाहिए । हिन्दुओ, हमें जागृत होकर ऐसे कृत्योंका विरोध करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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