अजान भारतीय दंड संहिता के धाराओं 153 व 295 के अधीन संज्ञेय अपराध है। अजान मुसलमानों व गैर मुसलमानों के बीच मजहब के आधार पर शत्रुता उत्पन्न करता है। लेकिन नागरिक अथवा जज की परिधि से बाहर है। उपरोक्त धाराओं के अंतर्गत किए गए अपराधों का संज्ञान/संस्तुति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 196 के अधीन प्रेसीडेंट या राज्यपाल ही दे सकता है। लेकिन किसी प्रेसीडेंट या राज्यपाल ने सन् 1947 से आज तक किसी अजान लगाने वाले अपराधी इमाम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 व 295 के अधीन अभियोग चलाने की संस्तुति नहीं दी, जब कि दिल्ली पुलिस आयुक्त ने भारतीय दंड संहिता के धारा 99 के अंतर्गत सुरक्षा मांगने के कारण मेरे विरुद्ध 153बी व 295ए के अधीन अभियोग चलाए। मै 26.2.2003 को आरोप मुक्त भी हुआ लेकिन अजान आज तक बंद नहीं हुई। स्पष्टतः उपरोक्त धाराओं का दुरुपयोग राज्यपाल वैदिक संस्कृति को मिटाने और इमामों को संरक्षण देने के लिए करते आ रहे हैं। आर्यावर्त सरकार इसे रोकना चाहती है। क्या मीडिया निज हित में आर्यावर्त सरकार का साथ देगी?
साभार
नेहरू खान वंश भाग-17
अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी
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