गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः ।
या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिःसृता ।।
अर्थ : स्वयं भगवान श्री पद्मनाभके श्रीमुखसे गायी(सुनाई ) गयी श्रीमद्भगवद्गीता जैसे दिव्य ग्रंथका अभ्यास करनेके पश्चात क्या और कोई शास्त्र पढनेकी आवश्यकता हो सकती है क्या ?
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