कलियुगमें नामसंकीर्तनयोगसे ही कल्याण सम्भव


हरेर्नामैव नामैव नामैव मम जीवनम् । 

कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा ।।

अर्थ : कलियुगमें नामसंकीर्तनयोगके सिवाय और कोई योगमार्गसे गति संभव नहीं है नहीं है नहीं है  और हरिका नाम लेना ही मेरा जीवन (अर्थात् उसमें ही जीवनकी सार्थकता है) है !



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