हमारा वर्तन कैसा होना चाहिए ?


यस्मिन यथ वर्तते यो मनुष्यस्तस्मिस्तथा वर्तित्व्यं स धर्मेः।
मायाचारी मायया वर्तितव्यः साध्वाचारः साधुना प्रत्युपेयः।।

– विदुर नीति 

अर्थ : जो अपेक्षा हमें दूसरोंके वर्तनसे होता है, वैसा ही हमें भी करना चाहिए, यही धर्म है। यदि कोई कपटसे वर्तन करे तो उसका प्रत्युत्तर भी उसी प्रकार देना चाहिए । जिसका व्यवहार अच्छा हो उसे सम्मान देना चाहिए ।



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