कलियुग की सर्वश्रेष्ठ साधना नामसंकीर्तनयोग है | उठते -बैठते और अपने सर्व दैनिक कार्य करते समय नाम सुमिरन करते रहने से हमारी आध्यात्मिक प्रगति होती है | नाम के प्रति भक्ति ही भक्तों की शक्ति होती हैं |
राम नाम की महिमा :
* नर नारायन सरिस सुभ्राता।
जग पालक बिसेषि जन त्राता॥
भगति सुतिय कल करन बिभूषन।
जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ॥- बालकांड रामचरितमानस
अर्थ :-ये दोनों अक्षर नर-नारायण के समान सुंदर भाई हैं, ये जगत का पालन और विशेष रूप से भक्तों की रक्षा करने वाले हैं। ये भक्ति रूपिणी सुंदर स्त्री के कानों के सुंदर आभूषण (कर्णफूल) हैं और जगत के हित के लिए निर्मल चन्द्रमा और सूर्य हैं॥
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