आत्मज्ञानं समारंभस्तितिक्षा धर्म नित्यता |
यमर्था नापकर्षन्ति स वै पण्डिताः उच्यैते || – विदुर नीति
अर्थ : जो व्यक्ति अपनी आत्मासे परिचित है (आत्मसाक्षात्कारी हो गया हो), अपनी शक्तिको जानता है , अपनी शक्तिके अनुरूप कार्य करता है उसे ही पंडित कहते हैं ।
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