
हमारी धर्म निरपेक्ष व्यवस्था ( धर्मद्रोही कहना अधिक योग्य होगा ) में विद्यार्थियों को नियमित पाठ्यक्रम अंतर्गत यौन शिक्षा दी जाती परंतु वासना को नियंत्रित करने हेतु नैतिक मूल्य और साधना संबन्धित ज्ञान नहीं दिया जाता है ऐसे में इस देश चहुं ओर स्त्री के चरित्र का हनन हो तो आश्चर्य क्या ! जिस समाज में धर्म का आधार न हो वैसे समाज का पशु से भी निकृष्ट वर्तन करना स्वाभाविक है , पशु भी मात्र प्रजनन योग्य साथी से प्रजनन के लिए और ऋतु काल में संबंध स्थापित करते हैं। धर्म निरपेक्ष समाज में तो विक्षिप्त स्त्री , विधवा एवं बालिकाओंके भी नृशंस एवं अमानवीय प्रकार से शील हरण किए जा रहे हैं ! निश्चित ही ये घृणित एवं निंदनीय प्रसंग विनाशकारी काल के आगमन की सूचना दे रहा है जहां माहकाल अपने तांडव से सभी दुर्जनों का संहार करेंगे !-तनुजा ठाकुर
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