एक जिज्ञासुने कहा “आपके लेख सदैव कडवे सत्यको कडक शब्दोंमें उजागर करते हैं ।”
मैंने कहा “क्या करें पिछले बारहसे चौदह शताब्दीसे लेकर आज तक सर्वधर्म समभाव रूपी मीठा-मीठा मिठाई खाते मीठा सुनते, कहते और देखते हम सभी हिंदुओंको आध्यात्मिक मधुमेह (diabetes) अर्थात धर्मग्लानि हो गयी है अतः अब करेलेके रसके सिवा दूजा कोई उपाय ही नहीं बचा है !! धर्मग्लानि रोकने हेतु सत्य रूपी संजीवनीका कडवा घूंट तो पीना ही होगा अन्यथा आनेवाली पीढी हमें कभी क्षमा नहीं करेगी” !-तनुजा ठाकुर
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