दुर्गा स्तुति


विश्वेश्वरीं जगद्धात्रीं स्थिति संहार कारिणीम् ।
निद्रां भगवतीं विष्णोरतुलां तेजसः प्रभो ।।
अर्थ : हे विशेश्वरी ! हे जगतधात्रि आप ही इस ब्रह्मांडकी उत्पत्ति, स्थिति एवं लयकी कारण है ! आप निद्राकी देवी हैं ! आप विष्णुके अतुलनीय तेजस्विता हैं ! आपको नमन है !


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