
पुरुषों ! काम वासना रूपी भस्मासुरने सर्वत्र आक्रमण कर दिया है ! अतः परस्त्रीको ‘मैडम’ संबोधित करनेके स्थानपर ‘मां’ स्वरूपमें सम्बोधन आरंभ करें, चाहे सामनेवाली स्त्रीको वह मान्य हो या नहीं हो, यह अपने लिए करें, यही हमारी प्राचीन वैदिक संस्कृति रही है। मात्र यह स्वरूप ही आपको बचा सकता है अन्यथा इस वासना रूपी असुरकी बलि चढनेमें अब किसीको समय नहीं लगने वाला ! अंतर्मुख हो जाएं न बुरा देखें, न पढें, न सुने !! -तनुजा ठाकुर
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