धर्मशिक्षणके अभावमें, मैकालेकी आसुरी शिक्षणके प्रभावमें एवं पाश्चात्य संस्कृतिके अंधा अनुकरण करनेके कारण आज हम व्यष्टि स्तरके धर्म पालन नहीं करते फलस्वरूप हमारी व्यष्टि अधोगति हो गयी है और समाजमें व्याप्त धर्मग्लानिके एवं निधर्मी राष्ट्र प्रणालीके कारण समष्टि स्तरका पतन आरंभ हो गया है । ऐसेमें समाजको देवता एवं प्रकृतिका कोप प्राकृतिक आपदाके रूपमें सहन तो करना ही होगा -तनुजा ठाकुर
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