धर्मेण राज्यं विन्देत धर्मेन परिपालयेत् ।
धर्म मूलां श्रियं प्राप्य न जहाति न हीयते – विदुर नीति
अर्थ : राजाको चाहिए कि धर्मसे राज्यको प्राप्त करें और धर्मसे राज्यका पालन-पोषण करे । धर्ममूलक ऐश्वर्यको प्राप्त होकर, वह राजा न ऐश्वर्यको छोडता है और न ही ऐश्वर्यके द्वारा छोडा जाता है ।
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