ज्ञानीको समय, स्थान और शक्तिका रहता है भान


इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः। देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।। – चाणक्य नीति                              
अर्थ : सारस पक्षीकी भांति एक ज्ञानीजनको समय, स्थान और शक्तिका भान रहता है व वह प्रत्येक कार्यमें सफलता प्राप्त करता है ।

 



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