यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।। – मनुस्मृति अध्याय ३, श्लोक ५६
अर्थ : जहां स्त्री जातिका आदर-सम्मान होता है, उनकी आवश्यकताओं-अपेक्षाओंकी पूर्ति होती है, उस स्थान, समाज तथा परिवारपर देवतागण प्रसन्न रहते हैं । जहां ऐसा नहीं होता और उनके प्रति तिरस्कारमय व्यवहार किया जाता है, वहां देवकृपा नहीं रहती है और वहां संपन्न किये गये कार्य सफल नहीं होते हैं ।
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