चरितव्यमतो नित्यं प्रायश्चित्तं विशुद्धये । निन्द्यर्हि लक्षनैर्युक्ता जायन्तेs निष्कृतैनसः ।। – मनुस्मृति
अर्थ : जो पापी लोग प्रायश्चित नहीं करते वे परिणामस्वरूप अगले जन्ममें निंदनीय लक्षणोंसे युक्त होकर जन्म लेते हैं; अतः विवेकशील मनुष्यको चाहिए कि वह अपनी शुद्धिके लिए नित्य प्रायश्चित्त करे ।
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