अनेक साधक कहते हैं कि ध्यान करता हूंं, परन्तु साठ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तरके नीचे ध्यान नहीं होता, अपितु ध्यानाभ्यास होता है; क्योंकि ध्यान करनेके लिए मनमें विषय-वासनाके संस्कार न्यून होने चाहिए ! अतः सन्तोंने कलियुगकी योग्य साधना नामजप बताई है; क्योंकि आज विश्वकी ८०% जनसंख्या ३०% आध्यात्मिक स्तरके नीचे है और नामजप २५ % के ऊपर भी किया जा सकता है । यदि कोई भी साधक उसके लिए थोडा गम्भीरतासे प्रयास करे तो ! -तनुजा ठाकुर
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