प्रार्थना :
मूक होइ बाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन।
जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलिमल दहन॥2॥ – बालकांड – तुलसी रचित रामचरितमानस
भावार्थ:-जिनकी कृपा से गूंंगा बहुत सुंदर बोलने वाला हो जाता है और लंगडा-लूला दुर्गम पहाड़ पर चढ़ जाता है, वे कलियुग के सब पापों को जला डालने वाले दयालु (भगवान) मुझ पर द्रवित हों (दया करें) ।
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