धर्म अधिष्ठित राजनीति ही राष्ट्रको आंतरिक और बाह्य सुरक्षा देती है


कुछ मूढ़ कहते हैं राजनीति और धर्मको विभक्त ही रखा जाये तो अच्छा है ! तो सत्य जान लें धर्म अधिष्ठित राजनीति राष्ट्रको आंतरिक और बाह्य सुरक्षा देती है उससे उस राष्ट्रमें स्त्री, बच्चे और वृद्ध, अर्ध रात्रिमें भी निडर होकर भ्रमण कर सकते हैं और राष्ट्र सशक्त होनेसे दुश्मन पडोसी स्वप्नमें भी राष्ट्रकी सीमा पार करनेका विचार नहीं करता , प्रजा भी धर्माचरणी होती है क्योंकि प्रजा, राजाका अनुशरण करती है अतः समाजमें नैतिक मूल्योंका सतत संवर्धन होता है और इस प्रकार समाजमें राम राज्य समान सुराज्य होता है !
धर्म विरहित राजनीति होनेपर आसुरी प्रवृत्ति वाले सत्तालोलुप व्यक्ति सभी प्रकारके कुकर्म कर राजसत्ताको हथिया लेते हैं और समाजमें स्त्री, वृद्ध और बालक कोई भी सुरक्षित नहीं होता , जब दुशमन देखता है कि राजा अपनी प्रजाको ही सुरक्षा नहीं दे सकता है तो वह आए दिन सीमा पार कर आक्रमण कर देशकी भूमिको अपने नियत्रणमें करते रहता है ! राजाके पापी होनेपर उसे सम्मान मिलनेसे (लाल बत्ती वाली गाड़ी और z स्तरकी सुरक्षा ) प्रजाका भी पाप करने हेतु मनोबल बढ़ता है और वह भी पाप करने लगता है और स्थिति ऐसी हो जाती है कि राजा और प्रजाको पाप कर्म, पाप ही नहीं लगता और ऐसे देशका सर्वनाश शीघ्र हो जाता है ! और यह सब तो आप इस धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रमें प्रतिदिन देख ही रहे हैं अर्थात हम विनाशकी ओर बढ़ रहे हैं !
अतः सनातन धर्म अधिष्ठित राजनीति और राष्ट्र प्रणाली ही देश की सर्वांगीण प्रगति करवानेका सामर्थ्य रखती है यह एक चिरंतन सत्य है ।
संक्षेप में –
धर्म+राजनीति = सुराज्य
राजनीति- धर्म = आसुरी राज्य
एक विशेष बात बता दूँ इस ब्रह्मांड में धर्म एक ही है वैदिक सनातन धर्म शेष सर्व पंथ है अतः पंथ अधिष्ठित सभी देशोंमें भी आसुरी राज्य ही है – तनुजा ठाकुर



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