प्रावाद: सत्यम् एव अयं त्वां प्राति प्रायशो नॄप । पतिव्रतानां न अकस्मात् पतन्ति अश्रूणि भूतले ।।
अर्थ : अपने पति, राजा रावणके मृत देहको देखकर, मंदोदरीने कहा “जब किसी पतिव्रता स्त्रीके आंसू जब भूमिपर गिरता है तो वह व्यर्थ नहीं जाता और यह आपके साथ पुनः सिद्ध हो गया है”।
(सीता माता एक पतिव्रता नारी थीं और उन्होंने अपने धर्मपालन पूरी निष्ठासे की थी; अतः जब रावणने उनका बलात् अपहरण कर उन्हें मानसिक प्रताडना दी तो ऐसी स्थितिमें रावणका सर्वनाश तो निश्चित ही होना था। पतिके मृत्युके पश्चात भी इस प्रकारका चिंतन वह भी रावणकी पत्नीद्वारा, उनकी महानताको दर्शाता है। अतः वे पूजनीय स्त्रियोंकी गिनतीमें आती हैं। ) – तनुजा ठाकुर
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