अधः पश्यसि किं वृद्धे पतितं तं किं भुवि ।
रे रे मूर्ख न जानासि गतं तारुण्यमौक्तिकम् ।। – चाणक्य नीति
अर्थ : एक अत्यन्त वृद्ध और कमरसे झुकी हुई स्त्रीसे एक युवकने व्यंग्यात्मक रूपसे पूछा , “ क्या ढूंढ रही हैं कुछ गिर गया है या खो गया है ” ? वृद्ध स्त्रीने कहा, “मूर्ख , देख नहीं रहे हो अपने यौवनके बीते हुआ समयको ढूंढ रही हूं ।”
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