
नास्तिककी अपेक्षा आस्तिकको उसके पाप कर्मोंका अधिक कठोर दण्ड देनेका ईश्वर प्रद्त्त विधान है ! नास्तिक तो अपनी अज्ञानतावश ईश्वरके अस्तित्त्वको ही नहीं मानता ! आस्तिक सब जानते हुए पाप कर्म करता है, अतः वह अधिक बडा अपराधी होता है; अतः आस्तिकने बुरे कर्म करनेसे पूर्व उसके फलका अर्थात् ईश्वरद्वारा मिलनेवाले दण्डका विचार अवश्य कर लेना चाहिए ! – तनुजा ठाकुर
Leave a Reply