दुर्लभ मनुष्य देहका महत्त्व जानें !


इतः को न्वस्ति मूढात्मा यस्ति स्वार्थे प्रमाद्यति |
दुर्लभम् मानुषं देहं प्राप्य तत्रापि पौरुषं ||  – विवेकचूडामणि
अर्थ : दुर्लभ मनुष्य देह और उसमें भी पुरुषकी योनिको पाकर जो स्वार्थ साधनमें प्रमाद करता है उससे अधिक और मूढ कौन होगा |
भावार्थ : मनुष्य जीवन अत्यन्त अनमोल है, इस तथ्यकी पुष्टि संत तुलसीदास करते हुए कहते हैं कि बडे भाग मानुस तन पावा अर्थात चौरासी लाख योनियोंमें भटकनेके पश्चात् यह मनुष्य देह प्राप्त होता है अतः इस देहका महत्त्व समझना चाहिए | इस देहको प्राप्त करना तभी सार्थक होता है जब हम ईश्वरप्राप्ति या मोक्षप्राप्ति हेतु प्रयत्नशील होते हैं; किन्तु अज्ञानतावश हम इस मनुष्य जीवनमें समयका उपयोग योग्य प्रकारसे नहीं करते हैं | आद्यगुरु शंकराचार्य कहते हैं कि मनुष्य देहमें भी यदि पुरुषका देह प्राप्त हो और तब भी वह साधना न करें एवं पशु समान निद्रा, भय, आलस्य और मैथुनमें लिप्त होकर अपना अनमोल मनुष्य जीवन व्यर्थ कर दे तो उसके समान कोई दूसरा मूर्ख नहीं होता ! अनेक पुरुषोंको लगता है कि धन, यश, ऐश्वर्य यह सब प्राप्त करना पुरुषार्थ है; किन्तु यह सत्य नहीं खरा पुरुषार्थ अपना परम कल्याण सिद्ध करना अर्थात् आत्मसाक्षात्कार करना है | अतः विवेकशील मनुष्य अपना सम्पूर्ण ध्यान इसपर ही केन्द्रित रखता है  – तनुजा ठाकुर



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution