
मेरे कुछ पाठक मेरेद्वारा दिये शंकाओंके समाधानपर मेरी विद्वताकी भूरी-भूरी प्रसंशा करते हैं , इन सभी प्रसंशको मैं सूचित करना चाहुंगी कि मैं कोई विदुषी नहीं मात्र अपने श्रीगुरुद्वारा लिखे सभी तत्त्वों का सूक्ष्मतासे अभ्यास किया है और उसे आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती हूं ।
मेरेद्वारा दिये गए राष्ट्र एवं धर्म विषयक सारे योग्य दृष्टिकोण मेरे श्रीगुरु परम पूज्य डॉ. जयंत बालाजी आठवले के हैंं ! मैं वर्ष १९९७ में प्रथम बार जब उनकेद्वारा संकलित एक ग्रंथका वाचन किया था तबसे आज तक उनके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सरल तर्क संगत दृष्टिकोणसे अति प्रभावित रही हूं । आज भी उनके दृष्टिकोण जो मराठी दैनिक सनातन प्रभातमें छपते रहते हैं उसे उसी उत्साहसे पढती और आत्मसात करती हूं साथ ही आपसे साझा भी करती हूं ! मैं उनकी ध्वनिप्रक्षेपक यंत्र मात्र हूं कोई विदुषी नहीं -तनुजा ठाकुर
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