विदेशमें रहनेवाले कुछ हिंदुओंसे सम्पर्कमें आनेके पश्चात् यह ज्ञात हुआ है कि जो वहांकी चकाचौंधमें रमनेके पश्चात भारत जैसे देशका परित्याग कर, अपना धर्मपालन करना तक छोड चुके होते हैं, उनके बच्चोंको विचित्र प्रकारके रोग हो गए है ! अर्थात् विदेशी वातावरण, भोजन , रहन -सहन एवं वहांकी तमोगुणी संस्कृतिसे उनकी पीढी रोगग्रस्त हो गई है ! पिछले तीन चार वर्षोंमें अनेक हिन्दुओंसे हुई वार्तालापसे यह तथ्य ज्ञात हुआ है -तनुजा ठाकुर (१३.३.२०१६)
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