कलियुगी जीवको मात्र अपने सांसरिक लाभ और अपने प्रारब्धके कष्टको बिना स्वत: श्रम किए उसे दूर करनेवाले बाबाजी चाहिए परिणामस्वरूप उन्हें संत, योगी और सिद्ध पृरुष नहीं मिलते और जो मिलते वे उन्हें ठग लेते हैं, ध्यान रहे आपकी आध्यात्मिक पात्रता अनुरूप ही आपको अध्यात्मविद मिलते हैं !-तनुजा ठाकुर
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