आस्तिक होते हुए भी जो साधना न करे वह नास्तिकसे बुरा है – परम पूज्य भक्तराज महाराज


भावार्थ : किसी रोगकी औषधि ज्ञात होते  हुए भी उसे न लेना अधिक अयोग्य है |
अस्तिकको ईश्वरके अस्तित्वका ज्ञान होते  हुए भी उसकी प्राप्ति हेतु साधना
न करना, यह नास्तिकसे अर्थात  जिसे ईश्वरके अस्तित्वपर ही विश्वास नहीं, उससे भी अधिक बुरा है । जिसने अपने ज्ञानका उपयोग नहीं किया वह, अज्ञानीसे
अर्थात नास्तिकसे अधिक बुरा है |
संदर्भ : दैनिक मराठी सनातन प्रभात


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