धर्माचरणी होना चाहिए


सुखं न विना धर्मात् तस्मात् धर्मपरो भवेत् । – वाग्भटकृत अष्टांगहृदय, सूत्रस्थान २:१९ 

अर्थ : बिना धर्मपालनके सुखकी प्राप्ति संभव नहीं, अतः धर्माचरणी होना चाहिए |

 



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