भारतीय गायोंकी मेरुशृंखला


अनु सूर्यमुदयतां  ह्रुद्द्योतो हरिमा च ते।

गो रोहितस्य वर्णेन  तेन त्वा परि  दध्मसि  ।।

हमारे प्राचीन ग्रन्थोंमें ऐसा उल्लेख है कि भारतीय गायोंकी मेरुशृंखलामें एक ऐसी स्नायु होती है जिसे सूर्य केतू कहते हैं, जो सूर्य प्रकाशमें स्वर्णका निर्माण करती हैं यह तत्त्व विषैले पदार्थोंका प्रतिकारक होता है और ऐसे प्रतिकारक क्षमतायुक्त दुग्ध शरीरको पुष्ट तो करता ही है निरोग भी रखता है |



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution