स्थिर और अलिप्त अवश्य ही मुक्त होते हैं


सानुरागां स्त्रियं दृष्टवा मृत्युं वा संपुस्थितं । अविह्वलमनाः स्वस्थो मुक्त एव महाशय: ।। – अष्टावक्र गीता

अर्थ : वे निश्चित ही मुक्त होते हैं जो प्रेमसे आवेशित स्त्रीको और मृत्युको निकट देखकर भी स्थिर और अलिप्त रहते हैं ।



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