
भगवानसे प्रेम इन छ: भावोंकेद्वारा किया जा सकता है:-
१. मैया यशोदाके समान (वात्सल्य भावसे)
२. अर्जुनके समान (साख्य भावसे)
३. गोपियोंके समान (माधुर्य भावसे)
४. अक्रूरके समान (दास्य भावसे)
५. उद्धवके समान (ज्ञान भावसे)
६. सुदामाके समान (शान्त भावसे)
जब कोई मनुष्य इन छ: भावोंमेंसे किसी भी एक भावमें पूर्ण श्रद्धा और सम्पूर्ण विश्वाससे शरणागत भावमें स्थित होकर भगवानकी भक्ति करता है तो एक दिन भगवानकी कृपाका पात्र बन जाता है। -तनुजा ठाकुर
Leave a Reply