श्रीगुरु उवाच


धनाढ्य पिताकी संतानकी स्थिति तब दयनीय हो जाती है जब वह अपने पिताद्वारा अर्जित धनको नष्ट कर देता है, आज हिंदुओंकी स्थिति भी उनके पूर्वजोंद्वारा दिये गए ज्ञान, धर्म, संस्कृति, तत्त्वज्ञान, कला, आयुर्वेद, तीर्थक्षेत्र, शस्त्रविद्या इत्यादिके धरोहरको नष्ट कर सर्व क्षेत्रोंमें दयनीय हो गयी है । -परात्पर गुरु डॉ . जयंत आठवले (२६.५.२०१३)



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