अध्यात्मशास्त्रका लाभ


अध्यात्म छोड अन्य किसीभी विषयमें पदव्युत्तर शिक्षण (डॉक्टरेट) होनेपर, नया सीखनेका सुख नहीं मिलता; क्योंकि उन विषयोंमें पृथ्वीपर उपलब्ध मर्यादित ज्ञान होनेसे नया सीखने जैसा कुछ नहीं बचता । उनके लिए समाचार पत्रके समाचार ही नए होते हैं । इसके विपरीत अध्यात्ममें अनुभूति और ज्ञानके माध्यमसे प्रतिदिन अनेक बार नित्य नूतनताका अनुभव होता है । इससे नित्य सुख या आनंदकी अनुभूति होती है एवं जीवन आनंदमय होता है । सनातनके अनेक साधक इस अनुभूतिको प्राप्त करते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले (२०.१०.२००९)



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