संतवाणी


भक्तोंद्वारा सांसरिक जगतमें आचरणमें लाने योग्य  विविध भाव
१. समभाव
अ. अपने समान आयुवाले व्यक्तिसे भाई अथवा बहनसा व्यवहार रखें
आ  आयुमें ज्येष्ठों व्यक्तिने दूसरोंसे  पुत्रसा व्यवहार करें ।
इ  छोटे बच्चोंके साथ  छोटे बच्चों समान  व्यवहार करें ।
२. आत्मीय भाव :सभीके लिये आत्मीय भाव हो। अर्थात  सबसे  जैसे स्वयंसे प्रेम करते हैं वैसी आत्मीयता रखें ।
३. देवता भाव : परमेश्वरके रूपको या अपने इष्ट देवताके सभीमें देखें और सबसे आदरयुक्त व्यवहार करें ।
४. ईश्वरी भाव : भक्तको सर्व प्राणिमात्र एवं वस्तुओंमें ईश्वरकी प्रचीति होती है इसलिए उसका उसी प्रकारका  व्यवहार होता है । – (पू.) डॉ. वसंत बाळाजी आठवले



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution